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Sarsaparilla Q Mother Tincture के फायदे in hindi – Sarsaparilla Q Benefit and Uses in hindi

 

Sarsaparilla Q Mother Tincture के फायदे in hindi – Sarsaparilla Q Benefit and Uses in hindi.


Sarsaparilla Q Mother Tincture के फायदे in hindi - Sarsaparilla Q Benefit and Uses in hindi


सारसपैरिला ( Sarsaparilla Q )


यह दवा भारतीय उणबा’ से टिक्चर के रूप में तैयार की गई है। इस दवा का प्रभाव धर्म, मूत्रोंगों तथा जननेन्द्रियों पर विशेष रूप से होता है। सराणदार क फुन्सियों जिनमें बसन्त ऋतु में सस्त खुजली होती हो और खुजलाने पर उन पर पपड़ी बन जाये, यह दवा इस प्रकार की फन्सियों को शीघ्र दूर कर देती है, फोड़े फुन्सियाँ, सख्त खुजली, एक्जीमा, बालों की जड़ों में दर्द होना, उगलियों के आखिरी सिरों पर घाव हो जाना और फट जाना, उपदंश, चर्म में झुर्रियों पड़ जाना, नाखुनों के नीचे घाव हो जाना, उपदंश में पारा और उससे बनी दवाओं के अधिक प्रयोग से सारे शरीर पर फोड़े-फुन्सियाँ निकल आये जिनमें पीप पड़ जाये तो इस दवा से ये सब चर्म रोग दूर हो जाते हैं। यह दवा बच्चों के क्षय और सूखा मसान में भी बहुत लाभप्रद है। बच्चा सूखकर हड्डियों का ढाँचा रह गया हो विशेषकर जबकि बच्चे की गर्दन सूखकर बहुत पतली हो गई हो और शरीर पर मुर्रिया पढ़ गई हो। उपदेश और सुजाक के विषैले प्रभावों के कारण रोगी की हड़ियों और सोपड़ी में रात को विशेषकर सख्त दर्द होता हो, उपदंश और सुजाक के विषैले प्रभावों के कारण जोड़ों में दर्द और शोध आदि रोगों में भी बहुत गुणकारी है।

वृक्क और मूत्राशय की पथरियों, ककरियों और रेत को निकाल देती है। दबे हुए सुजाक के विषैले प्रभावों को भी दूर कर देती है। बिना इच्छा कपड़ों में मूत्र की बूंदें गिर जाना, मूत्र बंद हो जाना, मूत्राशय में दर्द, जलन और बोझ, तीव्र वृक्क शूल जो पथरी के कारण हो, इस दवा को प्रयोग कराने से पथरी, रेत आदि निकल कर तीव्र वृक्कशूल तक को आराम आ जाता है। मूत्र करने के बाद रोगी को इतना सस्त दर्द हो कि उसकी चीखे निकल जायें। गुप्ताँग गीले से रहें और उनसे दुर्गन्ध आये, वीर्य में रक्त आये, स्तनों की चूंचियाँ फटी हुई घायल या अन्दर धँसी हुई हो जिसके कारण बच्चा दूध तक न पी सके। मूत्र करने पश्चात् सर्दी, बसन्त ऋतु में और तर मौसम में कष्ट बढ़ जायें। ऐसे रोगी जिनको मूत्र करने के पश्चात् असहनीय दर्द और सारे शरीर में सख्त कंपकंपी होती थी और काफी चिकित्सा करने पर भी जिनको आराम न आया था, इस दवा की कुछ मात्राओं से ही वे स्वस्थ हो गये। इस दवा का मुख्य लक्षण यह है कि जब स्त्री को प्रदर आना आरम्भ होता है तो स्त्री के मूत्राशय और मूत्र संबंधी सब रोग दूर हो जाते हैं परन्तु प्रदर बन्द होते ही मूत्राशय के उपरोक्त तमाम कष्ट दोबारा आरम्भ हो जाते हैं जो दूसरी बार प्रदर आने तक रहते

मात्रा- 3 से 15 बूँदें थोड़े पानी में मिलाकर दिन में 3-4 बार पिलाते रहे।

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